PRODUCED BY http://www.grahonkichaya.yolasite.com आआआआ आआआ आआआआआआ आआ आआआआ आआआआआ सममोहन
सममोहन व वशीकरण - लाभ कैसे ले
जड़ी-बूटी के सममोहन कारक पयोग
षटकषटकमों की िविध, आधार एवम् वासतिवकता
दतातेय तंत मे वशीकरण पयोग
वषीकरण व सममोहन शिकत
सममोहन- वशीकरण आिद के पयोग
िविवध तंत पयोग
वशीकरण के अचूक टोटके
उचचाटनकमर- आचायर रावण का मत
आआआआ आआआआआआ सफेद गुंजा की जड़ को िघस कर माथे पर ितलक लगाने से सभी लोग वशीभूत हो जाते है। यिद सूयर गहण के समय सहदेवी की जड़ और सफेद चंदन को िघस कर वयिकत ितलक करे तो देखने वाली सती वशीभूत हो जाएगी। राई और िपयंगु को ÷ही' मंत दारा अिभमंितत करके िकसी सती के ऊपर डाल दे तो वह वश मे हो जाएगी। शिनवार के िदन सुंदर आकृित वाली एक पुतली बनाकर उसके पेट पर इिचछत सती का नाम िलखकर उसी को िदखाएं िजसका नाम िलखा है। िफर उस पुतली को छाती से लगाकर रखे। इससे सती वशीभूत हो जाएगी। िबजौरे की जड़ और धतूरे के बीज को पयाज के साथ पीसकर िजसे सुंघाया जाए वह वशीभूत हो जाएगा। नागकेसर को खरल मे कूट छान कर शुद घी मे िमलाकर यह लेप माथे पर लगाने से वशीकरण की शिकत उतपन हो जाती है। नागकेसर, चमेली के फूल, कूट, तगर, कु ंकु ंम और देशी घी का िमशण बनाकर िकसी पयाली मे रख दे। लगातार कुछ िदनो तक िनयिमत रप से इसका ितलक लगाते रहने से वशीकरण की शिकत उतपन हो जाती है। शुभ िदन एवं शुभ लगन मे सूयोदय के पशात उतर की ओर मुंह करके मूंगे की माला से िनम मंत का जप शुर करे। ३१ िदनो तक ३ माला का जप करने से मंत िसद हो जाता है। मंत िसद करके वशीकरण तंत की िकसी भी वसतु को टोटके के समय इसी मंत से २१ बार अिभमंितत करके
इिचछत वयिकत पर पयोग करे। अमुक के सथान पर इिचछत वयिकत का नाम बोले। वह वयिकत आपके वश मे हो जाएगा। मंत इस पकार है ऊँ नमो भासकराय ितलोकातमने अमुक महीपित मे वशयं कुर कुर सवाहा। रिव पुषय योग (रिववार के िदन पुषय नकत) मे गूलर के फूल एवं कपास की रई िमलाकर बती बनाएं तथा उस बती को मकखन से जलाएं। िफर जलती हुई बती की जवाला से काजल िनकाले। इस काजल को रात मे अपनी आंखे मे लगाने से समसत जग वश मे हो जाता है। ऐसा काजल िकसी को नही देना चािहए। अनार के पंचाग मे सफेद घुघची िमला-पीसकर ितलक लगाने से समसत संसार वश मे हो जाता है। कड़वी तूंबी (लौकी) के तेल और कपड़े की बती से काजल तैयार करे। इसे आंखो मे लगाकर देखने से वशीकरण हो जाता है। िबलव पतो को छाया मे सुखाकर किपला गाय के दध ू मे पीस ले। इसका ितलक करके साधक िजसके पास जाता है, वह वशीभूत हो जाता है। कपूर तथा मैनिसल को केले के रस मे पीसकर ितलक लगाने से साधक को जो भी देखता है, वह वशीभूत हो जाता है। केसर, िसंदरू और गोरोचन तीनो को आंवले के साथ पीसकर ितलक लगाने से देखने वाले वशीभूत हो जाते है। शमशान मे जहा अनय पेड़ पौधे न हो, वहा लाल गुलाब का पौधा लगा दे। इसका फूल पूणरमासी की रात को ले आएं। िजसे यह फूल देगे, वह वशीभूत हो जाएगा। शतु के सामने यह फूल लगाकर जाने पर वह अिहत नही करेगा। अमावसया की राित को िमटी की एक कचची हंिडया मंगाकर उसके भीतर सूजी का हलवा रख दे। इसके अलावा उसमे साबुत हलदी का एक टुकड़ा, ७ लौग तथा ७ काली िमचर रखकर हंिडया पर लाल कपड़ा बाध दे। िफर घर से कही दरू सुनसान सथान पर वह हंिडया धरती मे गाड़ दे और वापस आकर अपने हाथ-पैर धो ले। ऐसा करने से पबल वशीकरण होता है। पातःकाल काली हलदी का ितलक लगाएं। ितलक के मधय मे अपनी किनिषका उंगली का रकत लगाने से पबल वशीकरण होता है। कौए और उललू की िवषा को एक साथ िमलाकर गुलाब जल मे घोटे तथा उसका ितलक माथे पर लगाएं। अब िजस सती के सममुख जाएगा, वह सममोिहत होकर जान तक नयोछावर करने को उतावली हो जाएगी।
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